बदायूं की सियासत में बड़ा उलटफेर: सिनोद शाक्य और कुशाग्र सागर ने थामा सपा का दामन
लखनऊ में अखिलेश यादव ने दिलाई पार्टी की सदस्यता, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दातागंज और बिसौली में नए राजनीतिक समीकरण बनने के आसार
रोहिलखण्ड प्रभात | बदायूं।
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बदायूं की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। दातागंज विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक सिनोद कुमार शाक्य उर्फ दीपू भैया और बिसौली के पूर्व विधायक कुशाग्र सागर ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छोड़कर समाजवादी पार्टी (सपा) का दामन थाम लिया। सोमवार को लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दोनों नेताओं को सदस्यता दिलाई। इस दौरान सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव और बदायूं के सांसद आदित्य यादव भी मौजूद रहे।
दो पूर्व विधायकों के एक साथ सपा में शामिल होने से जिले की सियासत में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक नजरें अब दातागंज और बिसौली विधानसभा क्षेत्रों पर टिक गई हैं। दोनों नेताओं के पार्टी बदलने को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, सपा की ओर से अभी दोनों नेताओं की विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
दो बार दातागंज से विधायक रहे सिनोद शाक्य
सिनोद कुमार शाक्य का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ाव से गुजरा है। वह वर्ष 2007 और 2012 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर दातागंज विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए थे। इसके बाद वह समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने भाजपा का रुख कर लिया था। अब उनकी सपा में वापसी हुई है।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने दातागंज सीट से सिनोद शाक्य के बजाय कैप्टन अर्जुन सिंह यादव को प्रत्याशी बनाया था। इसके बाद सपा ने उन्हें विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवार बनाया, लेकिन उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया। इस घटनाक्रम के बाद वह भाजपा में शामिल हो गए थे। अब उनकी सपा में वापसी से दातागंज विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
कुशाग्र सागर की सपा में एंट्री से बिसौली में चर्चा तेज
बिसौली विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक कुशाग्र सागर वर्ष 2017 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचे थे। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें सपा प्रत्याशी आशुतोष मौर्य से 1,834 मतों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था।
कुशाग्र सागर ने हाल ही में भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया था। उन्होंने पार्टी के साथ करीब 11 वर्षों के जुड़ाव के बावजूद अपेक्षित सम्मान और विश्वास नहीं मिलने की बात कही थी। अब उनके सपा में शामिल होने से बिसौली विधानसभा क्षेत्र में भी नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
बिसौली में सपा के मौजूदा विधायक आशुतोष मौर्य हैं। ऐसे में कुशाग्र सागर की सपा में एंट्री के बाद पार्टी के भीतर आगामी चुनाव को लेकर क्या रणनीति बनती है, इस पर भी राजनीतिक विश्लेषकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं की नजर रहेगी।
2027 के चुनाव पर रहेंगी निगाहें
बदायूं जिले में दोनों पूर्व विधायकों के सपा में शामिल होने के बाद राजनीतिक दलों की आगामी रणनीतियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सिनोद शाक्य की दातागंज में पुरानी राजनीतिक पकड़ और कुशाग्र सागर का बिसौली में पूर्व विधायक के रूप में अनुभव सपा के लिए कितना लाभकारी साबित होगा, यह आने वाला समय बताएगा।
फिलहाल दोनों नेताओं की सपा में आने से पार्टी के संगठनात्मक विस्तार और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि सपा नेतृत्व दातागंज और बिसौली में इन नेताओं को क्या भूमिका देता है और आगामी चुनाव में टिकट वितरण के दौरान क्या तस्वीर सामने आती है।






